‘हौंसल्ले हो बुलन्द तो हर मुश्किल को आसां बना देंगे,
छोटी टहनियों की क्या बिसात, हम बरगद को हिला देंगे।
वो और हैं जो बैठ जाते हैं थककर मंजिल से पहले,
हम बुलन्द हौंसल्लों के दम पर आसमां को झुका लेंगे।’
*************************Vishvam***************
रहो जमीं पे मगर आसमां का ख्वाब रखो
तुम अपनी सोच को हर वक्त लाजवाब रखो
खड़े न हो सको इतना न सर झुकाओ कभी
तुम अपने हाथ में किरदार की किताब रखो
उभर रहा जो सूरज तो धूप निकलेगी
उजालों में रहो मत धुंध का हिसाब रखो
मिले तो ऐसे कि कोई न भूल पाये तुम्हें
महक वंफा की रखो और बेहिसाब रखो.....
आज नया कुछ लिख नहीं पाया इसलिए ये तुकबंदी भेज रहा हूँ.......
धोखा मिला जब प्यार में..............................
ज़िन्दगी में उदासी छा गयी............................
सोचा था छोड़ देंगे इस ज़िन्दगी को.......................
कमबक्थ तभी मोहल्ले में दूसरी आ गयी !!!!!!!!!!!
*************************Vishvam***************
आती हो गली मे हीर की तरह
लगती हो मीठी खीर की तरह
आंखों मे चुभी हो तीर की तरह
पर अब समझ चुका हूं कि तुम मुझे,
भीख मंगवाओगी फकीर की तरह।
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Thukra de koi to dil tut jata He,
Tod deti H yade jb apna koi samjh nhi pata He,
such khta H duniya wale,
Insan Dimag se nhi dil se Haar jata he
Brain Treaser By Vishvam
Brain Teasers!
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